Friday, March 6, 2009

गंगा के मझधार से एक नजारा पटना का - 1780 की कलाकृति



 १८ वीं सदी में मुग़ल सल्तनत के कमजोर होते हीं बिहार यूरोपीय तिजारती कंपनियों , मराठों ,नबावों के बीच अधिपत्य की लडाई अखाडा बन गया.

१७४५ तक बिहार मराठों ,बंगाल के नबावों और अफगानी फौजों के द्वारा रौंदी जाती रही .

बेहाल रियाया और बिहार की हुकूमत के कई हक़दार . 
पर इस उथल पुथल के बीच पटना का व्यापारिक महत्व निरंतर बढ़ता रहा . बिहार इसी बीच नील और अफीम की खेती और पटना  इस व्यापार का मुख्य केंद्र . पूर्व ,पश्चिम और उत्तर दिशा में देसी विदेशी व्यापार का केंद्र .स्थानीय और विदेशी व्यापारी की भरमार .डच , फ्रांसीसी , अंग्रेज, आर्मेनियाई , पश्चिम उत्तर प्रान्त , तिब्बत सब जगह के लिए और सब जगह का माल . 
पटना और मगध को रौंदती रघुजी भोंसले , दरभंगा के अफगानों और ईस्ट इंडिया कम्पनी की फौजें .
 
१७६४ के बाद क्रमशः ,बिहार में ईस्ट इंडिया कंपनी की मजबूत होती हुकूमत और जनता भी हलकानी के हालिया दौर से मुक्त . बाहरी फौजों के आक्रमण से मुक्ति . परमानेंट सेत्तलेमेंट की बुनियाद .


 और राजनैतिक स्थायित्व और व्यापार जनित शहरी समृधि के इस दौर में   गंगा नदी के धार से पटना ऐसा दिखता था.

1 comment:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

कौशल जी चित्र बहुत ही सुंदर है। मैं ने इस चित्र को पिकासा में ट्रीट किया है। ट्रीटेड चित्र की प्रति आप को प्रेषित करना चाहता था लेकिन आप का ई-मेल ही नहीं मिला। यदि आप का ई-पता मिले तो उसे आप को भेजूँ। ट्रीट करने के बाद तो चित्र का नक्शा ही बदल गया है।